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विभागीय कार्य

 

विभाग की मुख्य गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण

(१) धर्मार्थ सन्दान अधिनियम , १८९०
(२) उत्तर प्रदेश श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम, १९८३
(३) मंदिरों एवं धार्मिक संस्थाओं की व्यवस्था।
(४) धर्मार्थ संस्थाओं को अनुदान।
(५) विलीनीकृत राज्यों के मंन्दिरों की व्यवस्था एवं नियंत्रण तथा अनुदान।
(६) विभागीय आय-व्ययक, अनुदान व्यवस्था तथा लेखा एवं लोक लेखा आपत्तियां ।
(७) प्रदेश में स्थित अन्य प्रान्तों के मन्दिरों तथा धार्मिक संस्थाओं की व्यवस्था आदि।
(८) प्रदेश के समस्त धार्मिक मंदिरों एवं संस्थाओं से सम्बन्धित शिकायतों आदि की जॉच तथा उनका निस्तारण।
(९) उपरोक्त से संबधित संसद, विधान सभा तथा विधान परिषद प्रश्न।
(१०) प्रदेश में विद्यमान लोक महत्व के तीर्थ स्थलों पर स्थित मन्दिरों आदि के अधिग्रहण सम्बन्धी विधिक कार्यवाही।
(११) उपरोक्त अधिनियमों के अन्तर्गत चलने वाले वादों याचिकाओं रिटों आदि की पैरवी से सम्बन्धित कार्य।
व्यवहरित कार्य :-
धर्मादा संदान अधिनियम, १८९० के अन्तर्गत यदि किसी ट्रस्ट का संचालन उसकी प्रबन्ध समिति उपयुक्त नहीं पाती और वह प्रशासन के किसी योजना के अन्तर्गत राज्य सरकार के पक्ष में रखे जाने का आवेदन करती है तो इस संबंध में धारा-५ (१) के अधीन एक अधिसूचना से ट्रस्ट की समस्त सम्पत्ति रजिस्ट्रार चैरिटेबुल इन्डाउमेन्ट ट्रस्ट के पक्ष में यथाअधिनियम की धारा-४ (१) में प्राविधान है, रख दिया जाता है। इस विषय पर वर्तमान में कोई प्रस्ताव विभाग में विचाराधीन नहीं है। ट्रस्ट के ऐसी सम्पत्तियों के जिन्हे कोषाध्यक्ष चेरिटेबुल इन्डाउमेंट के पक्ष में रखा गया है, के रखरखाव एवं अधिष्ठान सम्बन्धी कार्य का सुनिश्चियन वित्त लेखा परीक्षा विभाग करते हैं।
जहॉ तक उत्तर प्रदेश श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम १९८३ का प्रश्न है, जिसके द्वारा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी का प्रबंधन एक न्यास परिषद के अधीन रखा गया है। न्यास परिषद में एक अध्यक्ष एवं पॉच सदस्य होते हैं।
धार्मार्थ संस्थाओं को अनुदान देने हेतु कोई धनराशि आय-व्ययक में व्यवस्थित नहीं की गई है अत: जहॉ तक विलीनीकृत रियासतों के मंदिरों की व्यवस्था, नियंत्रण तथा अनुदान का सम्बन्ध है, इसके अन्तर्गत छ: जनपदों झांसी, महोबा, जालौन, चित्रकूट, वाराणसी तथा हमीरपुर में स्थित विलीनीकृत रियासतों के पुजारियों हेतु कुल रू० १६,५०६-०० (रूपये सोलह हजार पॉच सौ चार मात्र) बंधान  स्वरूप प्रतिवर्ष स्वीकृत किया जाता है। इस हेतु सामान्य प्रशासन के बजट में अनुदान संख्या ८४ के अन्तर्गत धनराशि व्यवस्थित की जाती है।
उत्तर प्रदेश के धार्मिक मंदिरों एवं संस्थओं से संबंधित शिकायतों आदि के प्रकरण भी प्राय: विभाग में प्राप्त होते है और इनपर सम्बन्धित जिलाधिकारियों/ मण्डलायुक्तों से जॉच करा करके आख्या प्राप्त कर उनका निस्तारण किया जाता है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में होने वाली वार्षिक आय के सापेक्ष वहॉ के कर्मचारियों/ पुजारियों आदि के वेतन, रखरखाव एवं अन्य व्यय हेतु धनराशि की स्वीकृति शासन द्वारा प्रदान की जाती है। उल्लेखनीय है कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में शासन की ओर से पी०सी०एस० संवर्ग का एक अधिकारी मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पद पर नियुक्त किया जाता है। इसके अतिरिक्त तहसीलदार स्तर का एक अधिकारी अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पद पर तथा वित्त एवं लेखा सेवा का एक अधिकारी सहायक लेखधिकारी के पद पर मंदिर में कार्यरत है। आय-व्ययक तथा नीति विषयक प्रस्ताव न्यास परिषद के अनुमोदनोपरान्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा शासन की स्वीकृति हेतु प्रस्तुत किया जाता है।
 

 

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